- ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सात-आठ प्लांट संचालन का आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी नाराजगी
- सोसायटियों के बीच चल रहे प्लांट से धूल-धुएं और शोर की परेशानी, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को लेकर जताई जा रही चिंता
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर एक में आबादी के बीच संचालित हो रहे रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट को लेकर सोसायटी निवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में पिछले करीब तीन वर्षों से मानकों के विपरीत सात से आठ आरएमसी प्लांट संचालित हो रहे हैं। इन प्लांट के आसपास करीब आठ सोसायटियां हैं, जिनमें लगभग 50 हजार लोग रहते हैं।
निवासियों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला। लोगों का दावा है कि अधिकारियों की ओर से कागजों में प्लांट बंद कराने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ समय बाद संचालन दोबारा शुरू हो जाता है। इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्लांटों से निकलने वाली धूल और निर्माण गतिविधियों के कारण आसपास के वातावरण में प्रदूषण की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा भारी वाहनों की आवाजाही और मशीनों के संचालन से शोर की समस्या भी होती है। सोसायटी निवासियों का कहना है कि सुबह से देर रात तक चलने वाली गतिविधियों का असर उनके सामान्य जीवन पर पड़ रहा है।
आठ सोसायटियों के बीच प्लांट, बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता
आरएमसी प्लांट के आसपास एस डिवीनो, विहान ग्रींस, अंतरिक्ष, एआइजी रायल, हरिअंत अंबर, ट्विन काउंटी और फ्लोरा हेरिटेज समेत कई सोसायटियां स्थित हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन सोसायटियों में बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग रहते हैं। प्रदूषण और धूल के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की चिंता बनी रहती है।
लोगों का कहना है कि पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खराब वायु गुणवत्ता परेशानी बढ़ा सकती है। वहीं, रात में मशीनों और वाहनों की आवाजाही से होने वाले शोर के कारण नींद प्रभावित होने की शिकायत भी सामने आ रही है। निवासियों ने मांग की है कि संबंधित विभाग संयुक्त रूप से निरीक्षण कर यह जांच करें कि प्लांट किस अनुमति और किन पर्यावरणीय मानकों के तहत संचालित किए जा रहे हैं।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्थानीय निवासी सिद्धार्थ शुक्ला का कहना है कि सोसायटियों के बीच मानकों के विपरीत करीब आठ आरएमसी प्लांट संचालित हो रहे हैं। कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
पंकज शर्मा के मुताबिक, आरएमसी प्लांट के कारण आसपास रहने वाले लोगों को प्रदूषण और धूल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।
संजीव पुंडीर ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, प्रदूषण विभाग और जिला प्रशासन को समस्या से अवगत कराया गया है। उनका कहना है कि संबंधित विभागों को मौके पर निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी नियमों की स्थिति
आरएमसी प्लांट के संचालन को लेकर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित इकाइयों के पास आवश्यक स्वीकृतियां हैं या नहीं और वे निर्धारित पर्यावरणीय एवं संचालन मानकों का पालन कर रही हैं या नहीं। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग, प्राधिकरण और प्रशासन की संयुक्त जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच में प्लांट की लोकेशन, अनुमति, धूल नियंत्रण की व्यवस्था, वाहनों की आवाजाही और अन्य निर्धारित मानकों की स्थिति सामने आ सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर सभी प्लांटों का निरीक्षण करे और यदि कोई इकाई नियमों के विपरीत संचालित मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि आबादी के बीच लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान सिर्फ कागजी कार्रवाई से नहीं, बल्कि मौके पर प्रभावी कार्रवाई से होना चाहिए।
