डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : सास की मौत का दुख लेकर रेखा अपने पति देवेंद्र भारद्वाज के साथ अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए निकली थीं। उन्हें क्या पता था कि यमुना एक्सप्रेसवे का सफर उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बन जाएगा। रास्ते में स्लीपर बस में लगी आग ने रेखा से उनका जीवनसाथी छीन लिया। सास की चिता तक पहुंचने से पहले ही रेखा की जिंदगी में दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा।
हिसार निवासी रेखा और उनके पति देवेंद्र भारद्वाज स्लीपर बस से मोहबा जा रहे थे। देवेंद्र के पैर में कुछ समय पहले हुए हादसे के बाद राड पड़ी थी। इस वजह से उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती थी। बुधवार देर रात जब बस में आग लगी, उस समय दोनों गहरी नींद में थे। अचानक यात्रियों की चीख-पुकार और अफरातफरी से उनकी नींद खुली। आंख खुलते ही रेखा ने चारों तरफ धुआं और आग की लपटें देखीं।
रेखा ने घबराकर पति से कहा, “गाड़ी में आग लग गई है, बाहर निकलो।” देवेंद्र ने रेखा से कहा, “तुम निकलो, मैं आ रहा हूं।” रेखा किसी तरह बस से बाहर निकल आईं, लेकिन पैर में राड होने के कारण देवेंद्र तेजी से बाहर नहीं निकल सके। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
बस से बाहर निकलने के बाद रेखा लगातार पति को बचाने की गुहार लगाती रहीं। उन्होंने मदद के लिए लोगों से मिन्नतें कीं, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि किसी के लिए अंदर पहुंचना संभव नहीं था। कुछ ही देर में देवेंद्र आग की चपेट में आ गए। रेखा की आंखों के सामने उनका जीवनसाथी उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गया।
रात में संपर्क टूटा तो सुबह घटनास्थल पहुंचा बेटा
रेखा और देवेंद्र का बेटा सर्वोदय अपने माता-पिता की बस को ऑनलाइन ट्रैक कर रहा था। रात करीब 11:30 बजे अचानक बस की लोकेशन और संपर्क टूट गया। उसने कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसके मन में अनहोनी की आशंका गहराने लगी।
देर रात करीब सवा एक बजे राज कल्पना ट्रेवल्स की ओर से टिकट कैंसिल किए जाने के बाद सर्वोदय की बेचैनी और बढ़ गई। सुबह ट्रेवल एजेंसी से संपर्क किया तो घटना की स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उसे गुमराह किया गया। इसके बाद सर्वोदय जेवर पहुंचा। घटनास्थल पर माता-पिता को लेकर जा रही वही बस पूरी तरह जली हुई मिली तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
पिता देवेंद्र के हादसे में न बच पाने की जानकारी मिलते ही सर्वोदय फूट-फूटकर रो पड़ा। एक तरफ दादी के निधन का दुख था और दूसरी तरफ पिता को खोने का गहरा सदमा। परिवार पर एक ही सफर में दोहरी त्रासदी टूट पड़ी।
