- एम्स और फुजीफिल्म इंडिया ने एमओयू हस्ताक्षर किया
- देश के कई चिकित्सा केंद्रों में होगा एआइ आधारित एंडोस्कोपी का अध्ययन
- सामान्य एंडोस्कोपी तकनीक से तुलना कर जांची जाएगी उपयोगिता
- भोजन की नली और पेट के कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद मिलने की उम्मीद
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली : पेट और भोजन की नली के कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित एंडोस्कोपी तकनीक का अध्ययन किया जाएगा। इस संबंध में एम्स नई दिल्ली और फुजीफिल्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है। अध्ययन में देश के कई चिकित्सा केंद्रों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि एआइ आधारित एंडोस्कोपी ऊपरी पाचन तंत्र के कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान में चिकित्सकों की कितनी मदद कर सकती है।
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रो. डा. विनीत आहूजा और डा. अमित यादव अध्ययन का नेतृत्व करेंगे। अध्ययन के दौरान एआइ की सहायता से की जाने वाली हाई-डेफिनिशन व्हाइट लाइट एंडोस्कोपी (एचडी-डब्ल्यूएलई) की तुलना सामान्य एचडी-डब्ल्यूएलई तकनीक से की जाएगी। इससे यह आकलन किया जाएगा कि एंडोस्कोपी के दौरान कैंसर के शुरुआती और सूक्ष्म संकेतों को पहचानने में एआइ कितनी प्रभावी साबित होती है।
अध्ययन के दौरान एंडोस्कोपी करते समय एआइ प्रभावित या संदिग्ध हिस्सों की पहचान में चिकित्सकों को सहयोग करेगी। इसके बाद सामान्य तकनीक और एआइ आधारित तकनीक से प्राप्त परिणामों की तुलना की जाएगी। शोध के माध्यम से तकनीक की उपयोगिता, प्रभावशीलता और चिकित्सकीय निर्णय में इसकी भूमिका का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा।
इस बहुकेंद्रीय अध्ययन में एम्स की चिकित्सा एवं शोध विशेषज्ञता के साथ फुजीफिल्म की एंडोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एम्स के अनुसार, देश के अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एआइ आधारित एंडोस्कोपी की उपयोगिता का व्यापक मूल्यांकन किया जा सकेगा।
समझौते के दौरान एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन, डीन (रिसर्च) प्रो. राधिका टंडन, गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रमोद गर्ग, सीएसआर समिति के चेयरमैन प्रो. गोविंद मखारिया और फुजीफिल्म इंडिया के प्रबंध निदेशक कोजी वाडा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
एम्स ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल और शोध को बढ़ावा देना है। अध्ययन के निष्कर्षों से यह समझने में मदद मिलेगी कि ऊपरी पाचन तंत्र के कैंसर की शुरुआती पहचान में एआइ आधारित एंडोस्कोपी को किस तरह उपयोगी बनाया जा सकता है।
