- वाराणसी के स्टॉल पर हाथों से तैयार कलाकृतियों ने खींचा लोगों का ध्यान, पीएम मोदी को भेंट किया जा चुका है रामदरबार
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस)-2026 में वाराणसी की पारंपरिक काष्ठ कला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वाराणसी से आए स्टॉल पर लकड़ी पर हाथों से उकेरी गई विभिन्न कलाकृतियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। इनमें इस बार लकड़ी पर उकेरी गई पंचमुखी हनुमान की मूर्ति विशेष आकर्षण बनी हुई है।
स्टॉल संचालक नंदलाल शर्मा ने बताया कि वह काष्ठ कला की परंपरा को सातवीं पीढ़ी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पूर्वज भी इसी कला से जुड़े रहे हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में लकड़ी को तराशकर और उस पर बारीक नक्काशी कर देवी-देवताओं समेत विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां तैयार की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि हाथों की बारीक कारीगरी से तैयार इन कलाकृतियों को देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी पहचान मिली है। लकड़ी के चयन से लेकर उस पर डिजाइन उकेरने और अंतिम रूप देने तक पूरा काम कारीगरों द्वारा हाथों से किया जाता है। यही वजह है कि प्रत्येक कलाकृति अपने आप में अलग दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री को भेंट किया जा चुका है रामदरबार
नंदलाल शर्मा के अनुसार, उनके द्वारा तैयार किया गया रामदरबार भी खास पहचान बना चुका है। उनके मुताबिक, यह कलाकृति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भेंट की थी। इससे वाराणसी की पारंपरिक काष्ठ कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने में मदद मिली।
यूपीआइटीएस में प्रदर्शित पंचमुखी हनुमान की कलाकृति को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टॉल पर पहुंच रहे हैं। बारीक नक्काशी और पारंपरिक शिल्प शैली को देखकर लोग कारीगरों से इसकी निर्माण प्रक्रिया और काष्ठ कला की विरासत के बारे में जानकारी ले रहे हैं। ट्रेड शो में यह कलाकृति न केवल धार्मिक आस्था बल्कि वाराणसी की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा की झलक भी प्रस्तुत कर रही है।
