- यूपीआइटीएस में गोरखपुर के स्टाल पर जेन अल्फा और जेन जी ने बनाए दीपक व मूर्तियां
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : डिजिटल और आधुनिक दौर में पारंपरिक हस्तकलाएं धीरे-धीरे लोगों की दिनचर्या से दूर होती जा रही हैं। इसके बावजूद नई पीढ़ी में इन कलाओं को सीखने और करीब से समझने की रुचि दिखाई दे रही है। नालेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) में गोरखपुर के स्टाल पर जेन अल्फा और जेन जी के युवाओं ने चाक पर मिट्टी को आकार देकर पारंपरिक कला का प्रशिक्षण लिया।
स्टाल पर युवाओं को मिट्टी से दीपक, छोटी मूर्तियां और अन्य कलाकृतियां बनाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। चाक पर मिट्टी को आकार देने के लिए युवाओं में उत्साह नजर आया। पहली बार चाक पर हाथ आजमाने वाले युवाओं ने मिट्टी को अलग-अलग आकार देने की प्रक्रिया को करीब से समझा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें चाक पर मिट्टी रखने, उसे संतुलित करने और धीरे-धीरे मनचाहा आकार देने की तकनीक बताई गई।
स्टाल के फाउंडर जितेंद्र ने बताया कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक हस्तकलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्टाल पर युवाओं को मिट्टी की कला का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं को इस कला से जोड़ने के लिए केंद्रीय विद्यालय और सैनिक विद्यालयों में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
युवाओं को विरासत से जोड़ने की पहल
जितेंद्र ने बताया कि मिट्टी से कलाकृतियां बनाना केवल कला सीखना नहीं है, बल्कि यह देश की पारंपरिक विरासत और कारीगरों की मेहनत को समझने का माध्यम भी है। बच्चों और युवाओं को कम उम्र से ही ऐसी कलाओं से जोड़ा जाए तो पारंपरिक हुनर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
यूपीआइटीएस जैसे बड़े मंच पर युवाओं को चाक पर मिट्टी से कलाकृति बनाने का प्रत्यक्ष अनुभव मिलने से उन्हें पारंपरिक कला की बारीकियों को समझने का अवसर मिल रहा है। आधुनिक तकनीक के बीच इस तरह की गतिविधियां युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय हस्तशिल्प से जोड़ने का काम कर रही हैं।
