GBU : एआइ और मानव-पशु सह-अस्तित्व पर 40 देशों के विशेषज्ञों ने किया मंथन

रवि शर्मा, गौतमबुद्ध नगर : गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में आयोजित 59वें अंतरराष्ट्रीय अनप्रयुक्त एथोलाजी सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को पशु व्यवहार, कल्याण, एआइ और मानव-पशु सह-अस्तित्व पर दुनियाभर के विशेषज्ञों ने मंथन किया गया। सम्मेलन में पशु व्यवहार,पशु कल्याण, कृषि एवं पशुपालन, प्रयोगशाला पशु कल्याण, वन्यजीव प्रबंधन, साथी पशुओं की देखभाल, मानव-पशु संबंधों तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में विभिन्न देशों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और पशु कल्याण विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं। जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि पशु कल्याण से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल नई जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं का विकास करना होना चाहिए, जिनमें मनुष्य और पशु दोनों के हितों का संतुलन कायम हो। आधुनिक विज्ञान, तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। आयोजन सचिव डा. विजय पाल सिंह ने कहा कि अनुप्रयुक्त एथोलाजी का उद्देश्य पशु व्यवहार को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस वैज्ञानिक समझ का उपयोग पशुओं के लिए अधिक नैतिक, वैज्ञानिक और करुणामय व्यवस्थाएं विकसित करने में किया जाना चाहिए। वहीं, साथी पशुओं के मामले में व्यवहार संबंधी संकेतों को समझना उनके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। वन्यजीव क्षेत्र में व्यवहार संबंधी अध्ययन संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। प्रयोगशाला अनुसंधान में भी पशु कल्याण को लेकर नए वैज्ञानिक माडल और तकनीकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि जहां पशु प्रयोग आवश्यक हों, वहां उन्हें अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और जिम्मेदार बनाया जाए तथा अनावश्यक प्रयोगों को कम करने के लिए वैकल्पिक और उन्नत मॉडल विकसित किए जाएं।