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कानपुर अपडेट: 8 साल में करोड़ों बना था शाहजेव,रिटायर्ड दरोगा के बेटे ने 8 दिन में किए 180 करोड़ का लेनदेन

कानपुर अपडेट: 8 साल में करोड़ों बना था शाहजेव,रिटायर्ड दरोगा के बेटे ने 8 दिन में किए 180 करोड़ का लेनदेन

डिजिटल डेस्क, कानपुर : बेकनगंज के तलाक महल रेल पटरी इलाके में रहने वाला शाहजेव वारिस महज 8 साल में करोड़पति बन गया। पुलिस ने उसके गैंग का पर्दाफाश करते हुए देश के अब तक के सबसे बड़े 5600 करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन का खुलासा किया है और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शाहजेब वारिस एक होटल में महज 15,000 की नौकरी करता था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध से जुड़ा एक बेहद बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक शाहजेव वर्ष 2018-19 में कानपुर के एक बड़े होटल में काम करता था। वर्ष 2020 में वह एक सीए के संपर्क में आया और दो साल तक उसके साथ रहकर खातों का काम सीखा। इसी दौरान वह जाजमऊ के कई स्क्रैप और स्लॉटर हाउस कारोबारियों के संपर्क में आया, जहां से उसने फर्जी आईटीसी क्लेम का नेटवर्क सीखा। 2022 में उसने अपना खुद का काम शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार उसके गैंग में करीब 12 लोग शामिल हैं, जो किराये पर खाते लेने और भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर खाते खुलवाने का काम करते थे। इन खातों में ऑनलाइन गेमिंग ऐप से ठगी, साइबर फ्रॉड और फर्जी आईटीसी क्लेम से कमाया गया पैसा मंगवाया जाता था। शाहजेव के पास कई फ्लैट और संपत्तियां होने की जानकारी मिली है, साथ ही हरदोई में भी जहां उसकी ससुराल है । उसकी संपत्ति का पता चला है।

8 दिन में किए 180 करोड़ के लेनदेन
इस गैंग में शाहजेव का साथी रिटायर्ड दरोगा ताजदार का बेटा इखलाख भी शामिल है। चकेरी स्थित पटेल नगर की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में उसके खाते में महज आठ दिन में 180 करोड़ रुपए का लेनदेन और 1200 एंट्रियां हुईं जिसे देखकर बैंक अधिकारी भी हैरान रह गए। शाहजेव और उसके साथी सलमान की गिरफ्तारी के बाद इखलाख नेपाल भाग गया। साइबर सेल की जांच में पता चला कि उसके एचडीएफसी, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक खातों में हाल ही में कुल 89 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। पुलिस अब उस पर इनाम घोषित करने की तैयारी में है। गैंग का बैंकों में नेटवर्क इतना मजबूत था कि एक चेक से 45 लाख से 90 लाख रुपए तक की निकासी कर ली जाती थी। स्वरूप नगर और जाजमऊ स्थित बैंकों की डिटेल सामने आने के बाद यह खुलासा हुआ। इतनी बड़ी रकम को हवाला के जरिए ठिकाने लगाया जाता था, साथ ही पैसा क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश किया जाता था।

धमकाकर लेते थे बैंक दस्तावेज
पुलिस के मुताबिक शाहजेव और उसके साथी जिनके खाते खुलवाते थे, उनकी पासबुक, चेक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे। आसानी से दस्तावेज न देने वालों को धमकाकर बैंक के कागजात हासिल किए जाते थे। जूही बसंती नगर निवासी शादाब ने 18 अगस्त को साइबर थाने में शाहजेव और उसके साथियों के खिलाफ धमकाकर दस्तावेज लेने का मुकदमा दर्ज कराया था। शादाब के आरोप के मुताबिक शाहजेव ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर कट्टे के बल पर उसका बैंक खाता, चेकबुक, सिमकार्ड और एटीएम कार्ड ले लिया, जिसके बाद उसके खाते से 25 लाख रुपए का लेनदेन कर दिया गया। पुलिस को शाहजेव के पास से तीन चेकबुक मिली हैं, जिनमें एक शादाब के नाम की भी है — जो धमकी देकर चेकबुक लेने की पुष्टि करती है।

जमानत कराने वाले वकीलों का गिरोह भी सक्रिय

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपियों के 20-22 मर्चेंट खाते मिले हैं, जो सभी बाहर के हैं, जिससे जांच में दिक्कत आ रही है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वकीलों का एक गिरोह सक्रिय है जो साइबर ठगों को संरक्षण देता है और दिल्ली, मुंबई, गुजरात — जहां भी ये ठग पकड़े जाते हैं — वहां पहुंचकर उनकी जमानत कराता है। पुलिस अब ऐसे वकीलों का भी डाटा निकालने में जुटी है।