- राज कल्पना ट्रैवल्स पर यात्रियों के टिकट रद करने का आरोप, मृतकों के स्वजन ने मांगा जवाब; अगले दिनों की बुकिंग भी हुई कैंसिल
- यात्रियों को कारण बताए बिना टिकट रद करने की शिकायत, रिफंड को लेकर भी असमंजस
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद ट्रैवल एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि हादसे के करीब दो घंटे बाद ही एजेंसी ने बस में सफर कर रहे यात्रियों के टिकट रद करना शुरू कर दिया। मृतकों के स्वजन का दावा है कि टिकट रद किए जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में परेशानी हुई।
टिकट रद करने के पीछे मुआवजे से जुड़े दायित्व से बचने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टिकट रद करने का वास्तविक कारण क्या था और क्या इसका मुआवजे से कोई संबंध था। इसकी पुष्टि टिकट बुकिंग सिस्टम, कैंसिलेशन लॉग, रिफंड रिकॉर्ड और एजेंसी के आधिकारिक जवाब से ही हो सकती है।
हिसार निवासी मृतक देवेंद्र के बेटे सर्वोदय ने बताया कि वह अपने माता-पिता की बस की लोकेशन लगातार देख रहा था। रात करीब 11:30 बजे अचानक बस की लोकेशन और उनसे संपर्क टूट गया। कई बार फोन करने के बाद भी जवाब नहीं मिला तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई।
उनका दावा है कि रात करीब सवा 12 बजे राज कल्पना ट्रैवल्स की तरफ से टिकट कैंसिल होने का संदेश मिला। इसके बाद रातभर परिवार परेशान रहा। सुबह ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करने पर घटना की स्पष्ट जानकारी देने के बजाय उन्हें अलग-अलग जानकारी देकर गुमराह किए जाने का आरोप लगाया। बाद में जेवर पहुंचकर घटनास्थल पर जली हुई बस देखने के बाद परिवार को हादसे की भयावहता का पता चला।
अगले दिनों की बुकिंग भी रद होने का दावा
एक अन्य यात्री ने बताया कि उसने 23 सितंबर को 27 सितंबर की यात्रा के लिए टिकट बुक किया था। 24 सितंबर की सुबह उसके मोबाइल पर टिकट रद होने का संदेश आया। यात्री के मुताबिक, टिकट रद करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। संपर्क करने पर भी संतोषजनक जानकारी नहीं मिली और रिफंड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
यात्री का दावा है कि जब वह कानपुर के फजलगंज स्थित राज कल्पना ट्रैवल्स के कार्यालय पहुंचा तो वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।
टिकट रिकार्ड की जांच से सामने आएगी सच्चाई
हादसे के बाद टिकट कैंसिलेशन को लेकर उठे सवालों का जवाब डिजिटल रिकॉर्ड से मिल सकता है। जांच में यह देखा जा सकता है कि किस यात्री का टिकट कब रद हुआ, कैंसिलेशन किस सिस्टम या यूजर आइडी से किया गया, रद करने का कारण क्या दर्ज था और रिफंड किस खाते में किया गया।
यदि हादसे के बाद मृतक यात्रियों की बुकिंग भी रद की गई है तो मूल बुकिंग रिकॉर्ड, यात्री सूची, भुगतान विवरण और कैंसिलेशन लॉग को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण होगा। इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि टिकट रद करना सामान्य परिचालन प्रक्रिया थी या हादसे के बाद किसी विशेष निर्णय के तहत किया गया।
मुआवजे को लेकर भी उठ रहे सवाल
मृतकों के स्वजन की ओर से आशंका जताई जा रही है कि टिकट रद होने से भविष्य में यात्री होने के प्रमाण को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। हालांकि, केवल टिकट कैंसिल होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति की यात्रा का पूरा रिकॉर्ड समाप्त हो गया। बुकिंग, भुगतान, यात्री सूची, मोबाइल संदेश, बैंक/डिजिटल भुगतान और अन्य इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं।
बस हादसे के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और चालक-परिचालक समेत तीन आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। ऐसे में टिकट कैंसिलेशन का मामला भी जांच के दायरे में आता है तो एजेंसी से संबंधित डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड मांगे जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
