शिक्षागौतम बुद्ध नगर

भिक्षुणी संघ की परंपरा और समकालीन भूमिका पर हुआ मंथन, जीबीयू में जुटे 500 प्रतिभागी

भिक्षुणी संघ की परंपरा और समकालीन भूमिका पर हुआ मंथन, जीबीयू में जुटे 500 प्रतिभागी
  • भिक्षुणी संघ दिवस पर आध्यात्मिक एवं अकादमिक कार्यक्रम, महिला भिक्षुणियों की भूमिका और ऐतिहासिक परंपरा पर हुई चर्चा

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में भिक्षुणी संघ दिवस का आयोजन आध्यात्मिक और अकादमिक गरिमा के साथ किया गया। धम्म भूमि और विश्वविद्यालय के स्कूल आफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें भिक्षु, भिक्षुणियां, बौद्ध विद्वान, शिक्षक, विद्यार्थी और बौद्ध धर्म के अनुयायी शामिल रहे।

कार्यक्रम में बौद्ध परंपरा में भिक्षुणी संघ की स्थापना, उसके ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान समाज में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। धम्म भूमि की संस्थापक एवं मुख्य अतिथि डा. करुणा शील राहुल ने महिलाओं के भिक्षुणी संघ में प्रवेश के समकालीन महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में महिलाओं की आध्यात्मिक एवं सामाजिक भागीदारी का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने की। उन्होंने बौद्ध परंपरा में भिक्षुणी संघ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बौद्ध शिक्षाओं और परंपराओं के अध्ययन के साथ उनके सामाजिक प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल अफेयर्स से जुड़े डा. चिंतला वेंकट साई शिवसाई ने भिक्षुणी संघ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महापजापती गौतमी के नेतृत्व में भिक्षुणी संघ की स्थापना हुई थी और उन्होंने भगवान बुद्ध से दीक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने महिलाओं के भिक्षुणी संघ में प्रवेश से संबंधित परंपरागत रूप से वर्णित आठ विशेष नियमों (गरुधम्मों) और बौद्ध मठवासी परंपरा में उनके ऐतिहासिक संदर्भ की जानकारी दी।

विशेष अतिथि अपर आयुक्त वित्त, मेरठ मंडल अशोक गौतम ने वर्तमान समाज में भिक्षुणी संघ की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने आध्यात्मिक परंपराओं के सामाजिक प्रभाव और बदलते दौर में उनकी प्रासंगिकता पर विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान वेन भिक्षुणी विनय पिया, बुद्धालंकार बुद्ध, डा. सीएस पासवान, डा. ज्ञानदित्ता शाक्य, डा. प्रियदर्शिनी मित्रा, डा. मनीष टी. मेश्राम और डा. विक्रम सिंह समेत अन्य अतिथि, विद्वान और प्रतिभागी मौजूद रहे।