प्रसूता की मौत के बाद जागा प्रशासन, 10 साल से नियमों को ताख पर रखकर संचालित फलक लाइफ लाइन अस्पताल सील
– पीड़ित स्वजन की शिकायत पर डीएम ने कराई जांच, टीम को ओटी-आइसीयू और एनआइसीयू में मानक के अनुरूप नहीं मिली सुविधाएं
गौतमबुद्ध नगर : 10 साल से मालकों के विपरीत ग्रेटर नोएडा स्थित बिलासपुर कस्बा के फलक लाइफ लाइन हास्पिटल मानकोंं के विपरीत संचालित के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शनिवार को उस वक्त जिला प्रशासन जागा, जब पीड़ित की शिकायत पर अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचा। डीएम के निर्देश पर हुई जांच के बाद सील करने की कार्रवाई की। अस्पताल को जांच टीम को अस्पताल में ओटी, आइसीयू समेत अन्य वार्ड में मरीजों की सुविधाओं से संबंधित बड़ी खामियां मिलीं। चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त अस्पताल को हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए पुरस्कृत किया था।
सूत्रों ने बताया कि टीम को उक्त अस्पताल में सर्जरी के लिए न तो सर्जन थे और न ही मानक के अनुसार सुविधाएं। बावजूद अस्पताल संचालक कमाई के लालच मरीजों की जान जोखिम में डाल कर सर्जरी कर रहे थे। इस मनमानी का खामियाजा प्रसूता को जान गंवाकर भुगतना पड़ा। फिलहाल टीम ने कार्रवाई से पहले यहां पर भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करा दिया। मौके पर टीम की ओर से महिला का उपचार करने वाले डाक्टर को बुलाए जाने की बात कही गई, इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से उक्त डाक्टर को क्षेत्र से बाहर होने का दावा कर दिया गया। इसके अलावा अस्पताल में अग्निशमन की एनओसी भी नहीं दिखा सके। कमेटी की कार्रवाई के दौरान अस्पताल में लगभग 12 मरीज भर्ती थे, जिन्हें सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की कमेटी की ओर से बात कही गई। इस दौरान अस्पताल में भर्ती मरीज खुद आसपास के अस्पतालों में जाने की बात कहकर चले गए। हालांकि कमेटी की ओर से अस्पताल में सिर्फ तीन मरीजों के भर्ती होने का दावा किया जा रहा है।
—30 बेड का संचालित हो रहा था अस्पताल :
मृतका के देवर जितेंद्र का आरोप है कि अस्पताल के डायरेक्टर तकी इमाम के पास खुद कोई डिग्री नहीं है। जबकि डायरेक्टर की ओर से सर्जन होने का दावा किया जाता है। आरोप लगाया कि अस्पताल के बेसमेंट में ही सर्जरी करने का काम करता है। साथ ही आइसीयू और एनआइसीयू भी संचालित होता है। उनके भाभी की जब सर्जरी हुई थी, उस वक्त कोई भी डाक्टर नहीं था। बीते 10 वर्षों से 30 बेड का अस्पताल संचालित किया जा रहा था। मृतका के देवर का आरोप है कि भाभी की सर्जरी करने वाला तकनीशियन था, उसी ने एनस्थीसिया का डोज भी दिया था, जबकि एनस्थीसिया का डोज विशेषज्ञ के द्वारा दिया जाता है। जिलाधिकारी की ओर से जांच समिति में डा. संजीव सारास्वत, डा. टीकम सिंह, डा. अजय, एसडीएम अजय वर्मा और पूर्वा शर्मा शामिल किया गया।
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इन नियमों की अस्पताल में की गई अनदेखी :
अस्पताल के बेसमेंट में ही डिलीवरी, सीजेरियन डिलीवरी, पथरी का आपरेशन के अलावा कई अन्य तरह की सर्जरी की जा रही थी। इसके अलावा आइसीयू, एनआइसीयू भी बेसमेंट संचालित किया जा रहा था। सूत्रों ने बताया कि किसी भी अस्पताल के बेसमेंट में एइआइसीयू, आइसीयू या फिर ओटी का संचालन नहीं किया जा सकता है। सर्जरी करने वाले अस्पताल में नियमित सर्जन, एनस्थीसिया के स्पेशलिस्ट की तैनाती आवश्यक है। सर्जरी करने वाले अस्पताल को एबीबीएस, सर्जन की डिग्री के आधार पर ही पंजीकरण मिलता है।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर टीकम सिंह ने बताया प्रसव आपरेशन के दौरान एक महिला की मौत की शिकायत डीएम को पीड़ित द्वारा की गई थी। इसपर समिति की ओर से अस्पताल से किए गए सवाल के जवाब नहीं मिलने पर निरीक्षण किया गया। मरीज भर्ती थे, लेकिन इनकी देखरेख के लिए कोई डाक्टर नहीं था ना ही अस्पताल किसी तरह का कागजात व मौके पर डाक्टर आदि मौजूद नहीं थे। फायर, आपरेशन थियेटर, आइसीयू, सफाई व्यवस्था दुरूस्त नहीं पाई गई। इसके चलते सील करने की कार्रवाई की गई है।
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जांच के लिए गई टीम को अस्पताल के पंजीकरण से लेकर एनआइसीयू, आइसीयू समेत समस्त सुविधाओं से जुड़े कागजात मांग गए थे, लेकिन कोई भी कागज नहीं दिखाए जाने पर सील कर दिया गया है।
डा. मदन मोहन मणि त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी गौतमबुद्ध नगर